📅 04 Oct 2026 📍 बस्तर • छत्तीसगढ़ का नं. 1 न्यूज़ नेटवर्क
⚡ ब्रेकिंग न्यूज़
बस्तर केसरी न्यूज़ पर पढ़ें बस्तर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और देश की ताजा हिंदी खबरें
होम / स्वास्थ्य / नदी पर पुल नहीं, ग्रामीणों की जिंदगी बनी जोखिम 7-8 साल से अधूरा पुल, आज भी उफनती नदी पार कर रहे ग्रामीण
स्वास्थ्य

नदी पर पुल नहीं, ग्रामीणों की जिंदगी बनी जोखिम 7-8 साल से अधूरा पुल, आज भी उफनती नदी पार कर रहे ग्रामीण

📅 30 Aug 2026, 03:39 PM ✍️ Admin 👁 8,353 Views ⏱️ 2 मिनट पठन
नदी पर पुल नहीं, ग्रामीणों की जिंदगी बनी जोखिम 7-8 साल से अधूरा पुल, आज भी उफनती नदी पार कर रहे ग्रामीण

संवाददाता =नरेन्द चौधरी

माओवादी घटना के बाद बंद हुआ निर्माण, वर्षों बाद भी शासन-प्रशासन नहीं करा पाया शुरू

बचेली। विकास के दावों के बीच यह तस्वीर उन गांवों की हकीकत सामने लाती है, जहां आज भी एक पुल के अभाव में लोगों को उफनती नदी के भरोसे अपनी जिंदगी दांव पर लगानी पड़ रही है।

धुरली और मुलसनार के बेरमा गांव के बीच बहने वाली बड़ा नाला नदी पर पुल नहीं होने के कारण मुलसनार सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीण बारिश के दिनों में जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। नदी का पानी बढ़ने और बहाव तेज होने के बावजूद लोगों के पास आने-जाने का कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है।

राशन के लिए धुरली जाना हो, अस्पताल जाना हो, बाजार का काम हो या रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करनी हों—ग्रामीणों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। यहां तक कि किसी अपने की मौत होने पर अंतिम संस्कार के लिए भी ग्रामीणों को इसी उफनती नदी को पार कर धुरली पहुंचना पड़ता है।

सालों पहले शुरू हुआ काम, आज तक अधूरा

बताया जा रहा है कि करीब 7-8 साल पहले नदी पर पुल निर्माण का काम शुरू किया गया था। लेकिन माओवादी घटना में निर्माण कार्य में लगी मशीनरी को आग के हवाले किए जाने के बाद काम बंद हो गया। इसके बाद कुछ अज्ञात तत्वों द्वारा भी निर्माण कार्य को नुकसान पहुंचाए जाने की बात सामने आई।

लेकिन सवाल यह है कि घटना के बाद काम बंद हुआ तो इतने सालों में उसे दोबारा शुरू क्यों नहीं कराया गया?

एक तरफ सरकार गांव-गांव सड़क और पुल पहुंचाने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ मुलसनार और आसपास के ग्रामीण आज भी एक नदी को पार करने के लिए मजबूर हैं।

बाइक गांव में नहीं, नदी के इस पार छोड़नी पड़ती है

ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ पैदल नदी पार करने तक सीमित नहीं है। किसी काम से धुरली आने वाले कई ग्रामीण अपनी बाइक धुरली में ही खड़ी कर देते हैं। बाइक को झिल्ली से ढककर छोड़ना पड़ता है और खुद नदी पार करके मुलसनार लौटना पड़ता है।

बारिश के दिनों में नदी का बहाव बढ़ने पर यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। कब पैर फिसले, कब तेज बहाव किसी को अपने साथ बहा ले जाए—इसका कोई भरोसा नहीं।

कई बार जानकारी, फिर भी जिम्मेदारी किसकी?

ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को जानकारी दी गई, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

अब सवाल सिर्फ पुल का नहीं है।

सवाल यह है कि 7-8 साल से अधूरा पड़ा पुल आखिर कब पूरा होगा?

क्या किसी बड़े हादसे के बाद शासन-प्रशासन जागेगा?

और सबसे बड़ा सवाल—
क्या मुलसनार और आसपास के ग्रामीणों को सुरक्षित रास्ता मिलना उनका अधिकार नहीं है?

ग्रामीणों की मांग है कि बड़ा नाला नदी पर अधूरे पड़े पुल का निर्माण तत्काल शुरू कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में उन्हें अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े।

संबंधित खबरें (Related Stories)

↑ ☏
🏠
होम
🔥
ट्रेंडिंग
➕
खबर डालें
🔴
Live TV
👤
प्रोफाइल