1.78 करोड़ की सड़क या कीचड़ का तालाब? सात साल बाद भी बदहाल बिछियाटोला-भैंसाताल मार्ग
📅 25 Sep 2026, 12:43 PM
✍️ Admin
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संतोष यादव
बोर्ड पर 2019 में काम पूरा होने का दावा, बरसात में सड़क बनी दलदल; ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी
एमसीबी। पूर्व कोरिया एवं वर्तमान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के बिछियाटोला से भैंसाताल बिजुरी मार्ग की बदहाल स्थिति ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क किनारे लगे बोर्ड के अनुसार इस सड़क का पैकेज CG-11-MMGSY-KRY-28 है और इसकी स्वीकृत लागत 178.55 लाख रुपये बताई गई है। बोर्ड पर कार्य पूर्ण होने की तारीख 7 मई 2019 दर्ज है।
करीब सात वर्ष पहले कागजों में पूर्ण हो चुकी यह सड़क आज भी बरसात के दिनों में कीचड़ और पानी से सराबोर नजर आती है। ग्रामीणों के अनुसार मार्ग की स्थिति ऐसी हो जाती है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी मरीजों और जरूरतमंद ग्रामीणों को होती है, जिन्हें बारिश के दौरान अस्पताल तक पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क निर्माण पर करीब 1.78 करोड़ रुपये खर्च हुए और कार्य वर्ष 2019 में पूर्ण बताया गया, तो इतने वर्षों बाद सड़क की यह स्थिति कैसे हो गई? सड़क की गुणवत्ता, निर्माण कार्य और रखरखाव को लेकर संबंधित ठेकेदार तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह है कि जिम्मेदार विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को लेकर क्या कार्रवाई करते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एमसीबी से मौके पर जांच कराने, सड़क की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करने तथा आवश्यकता होने पर सड़क का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
सवाल सीधा है—यदि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क बरसात में सड़क के बजाय कीचड़ का तालाब बन जाए, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
एमसीबी। पूर्व कोरिया एवं वर्तमान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के बिछियाटोला से भैंसाताल बिजुरी मार्ग की बदहाल स्थिति ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क किनारे लगे बोर्ड के अनुसार इस सड़क का पैकेज CG-11-MMGSY-KRY-28 है और इसकी स्वीकृत लागत 178.55 लाख रुपये बताई गई है। बोर्ड पर कार्य पूर्ण होने की तारीख 7 मई 2019 दर्ज है।
करीब सात वर्ष पहले कागजों में पूर्ण हो चुकी यह सड़क आज भी बरसात के दिनों में कीचड़ और पानी से सराबोर नजर आती है। ग्रामीणों के अनुसार मार्ग की स्थिति ऐसी हो जाती है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी मरीजों और जरूरतमंद ग्रामीणों को होती है, जिन्हें बारिश के दौरान अस्पताल तक पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क निर्माण पर करीब 1.78 करोड़ रुपये खर्च हुए और कार्य वर्ष 2019 में पूर्ण बताया गया, तो इतने वर्षों बाद सड़क की यह स्थिति कैसे हो गई? सड़क की गुणवत्ता, निर्माण कार्य और रखरखाव को लेकर संबंधित ठेकेदार तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह है कि जिम्मेदार विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को लेकर क्या कार्रवाई करते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एमसीबी से मौके पर जांच कराने, सड़क की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करने तथा आवश्यकता होने पर सड़क का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
सवाल सीधा है—यदि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क बरसात में सड़क के बजाय कीचड़ का तालाब बन जाए, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?