|| 13 साल बाद झीरम घाटी मामले में बड़ा फैसला, 10 दोषियों को मृत्युदंड ||
📅 16 Sep 2026, 01:48 PM
✍️ Admin
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•••विशेष NIA अदालत ने सुनाई सजा, 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुआ था घातक नक्सली हमला•••
जगदलपुर:- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के करीब 13 साल पुराने मामले में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए सभी 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था।
अदालत ने दोषियों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया है। सजा के खिलाफ कानून के तहत अपील का रास्ता खुला है। रिपोर्टों के अनुसार दोषियों को अपील के लिए एक महीने का समय दिया गया है। मृत्युदंड का क्रियान्वयन भी उच्च न्यायालय की पुष्टि की कानूनी प्रक्रिया के अधीन होगा।
25 मई 2013 को दहल उठा था बस्तर
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला बस्तर की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान माओवादियों ने काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई थी। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 29 से 32 तक बताई गई है।
10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया
मामले में जिन 10 आरोपियों को दोषी ठहराकर मृत्युदंड सुनाया गया है, उनमें प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम, सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कवासी कोसा, आयता मडकम, मडकम देवा, जोगा मडकमी, बंजामी सना और महादेव नाग शामिल हैं।
11 आरोपियों से शुरू हुआ था मुकदमा
इस मामले में शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रही। अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और मामला लंबे समय तक अदालत में चला।
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और गंभीर माओवादी हमलों में शामिल रहा है। करीब 13 वर्ष बाद आए इस फैसले से मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव आया है, हालांकि मृत्युदंड के खिलाफ आगे की न्यायिक प्रक्रिया अभी शेष है।
अदालत ने दोषियों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया है। सजा के खिलाफ कानून के तहत अपील का रास्ता खुला है। रिपोर्टों के अनुसार दोषियों को अपील के लिए एक महीने का समय दिया गया है। मृत्युदंड का क्रियान्वयन भी उच्च न्यायालय की पुष्टि की कानूनी प्रक्रिया के अधीन होगा।
25 मई 2013 को दहल उठा था बस्तर
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला बस्तर की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान माओवादियों ने काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई थी। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 29 से 32 तक बताई गई है।
10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया
मामले में जिन 10 आरोपियों को दोषी ठहराकर मृत्युदंड सुनाया गया है, उनमें प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम, सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कवासी कोसा, आयता मडकम, मडकम देवा, जोगा मडकमी, बंजामी सना और महादेव नाग शामिल हैं।
11 आरोपियों से शुरू हुआ था मुकदमा
इस मामले में शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रही। अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और मामला लंबे समय तक अदालत में चला।
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और गंभीर माओवादी हमलों में शामिल रहा है। करीब 13 वर्ष बाद आए इस फैसले से मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव आया है, हालांकि मृत्युदंड के खिलाफ आगे की न्यायिक प्रक्रिया अभी शेष है।