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बस्तर राज्य की मांग जायज : लक्ष्मण बघेल बस्तर की संपदा का लाभ बस्तर की जनता को मिले, स्थानीय अधिकार और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित हो”

📅 08 Sep 2026, 02:24 AM ✍️ Admin 👁 8,621 Views ⏱️ 2 मिनट पठन
बस्तर राज्य की मांग जायज : लक्ष्मण बघेल बस्तर की संपदा का लाभ बस्तर की जनता को मिले, स्थानीय अधिकार और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित हो”

राजा ध्रुव

जगदलपुर। पृथक बस्तर राज्य की मांग को जायज बताते हुए लक्ष्मण बघेल* ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद भी बस्तर संभाग को विकास के मामले में अपेक्षित न्याय नहीं मिल पाया है। बस्तर प्राकृतिक एवं खनिज संपदाओं से समृद्ध क्षेत्र है। यहां की खनिज संपदाओं का दशकों से देश-विदेश में दोहन होने के बावजूद बस्तर संभाग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, संचार और अन्य मूलभूत सुविधाओं के क्षेत्र में आज भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।

संसाधन बस्तर के, विकास का लाभ कहीं और — यह व्यवस्था बदले

लक्ष्मण बघेल ने कहा कि बस्तर की भूमि में प्रचुर मात्रा में खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन* उपलब्ध हैं। इन संसाधनों के दोहन से राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है, लेकिन संसाधन क्षेत्र की स्थानीय जनता को उसके अनुरूप विकास का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले आर्थिक लाभ में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बस्तर के संसाधनों से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा बस्तर के ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय विकास पर खर्च होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर बस्तर की जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और पारंपरिक जीवन-पद्धति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। बस्तर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए विकास की नीति तैयार की जानी चाहिए।

मूलनिवासी संस्कृति और स्थानीय पहचान के संरक्षण की जरूरत

लक्ष्मण बघेल ने कहा कि बस्तर केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट *मूलनिवासी (आदिवासी) संस्कृति, परंपराओं, लोककलाओं, लोकभाषाओं, रीति-रिवाजों और सामुदायिक जीवन-पद्धति* के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के साथ बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और स्थानीय जीवन-पद्धति को सुरक्षित रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बिना बस्तर के विकास की कोई भी योजना पूर्ण नहीं मानी जा सकती।

पृथक बस्तर राज्य के लिए प्रमुख मांगें

लक्ष्मण बघेल ने पृथक बस्तर राज्य की मांग के साथ निम्न प्रमुख मांगें रखीं—

1.बस्तर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण किया जाए।

2. परंपरागत ग्रामसभा एवं स्थानीय स्वशासन* को प्रभावी एवं मजबूत बनाया जाए।

3.जल, जंगल, जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनों* में स्थानीय हित सुनिश्चित किया जाए।

4. बस्तर की परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए विशेष नीति* बनाई जाए।

5. स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं।

6. बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप *प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाए।

7पृथक बस्तर राज्य की मांग को लेकर सातों जिलों—बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा एवं दंतेवाड़ा में व्यापक एवं शांतिपूर्ण जनसंवाद कराया जाए।

8. राज्य गठन की आर्थिक, सामाजिक, प्रशासनिक एवं भौगोलिक व्यवहार्यता के अध्ययन के लिए *विशेषज्ञ समिति* का गठन किया जाए।

सात जिलों को मिलाकर बस्तर राज्य बनाने की मांग

लक्ष्मण बघेल ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बस्तर राज्य में बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा एवं कोंडागांव जिलों को शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जगदलपुर, जिला बस्तर को प्रस्तावित बस्तर राज्य की राजधानी एवं मुख्यालय बनाया जाए, ताकि क्षेत्र की प्रशासनिक आवश्यकताओं को बस्तर की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।

संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संवैधानिक मांग

लक्ष्मण बघेल ने कहा कि पृथक बस्तर राज्य की मांग भारत के संविधान के दायरे में रहकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से उठाई जा रही है। संविधान का *अनुच्छेद 3 संसद को मौजूदा राज्य के क्षेत्र से पृथक नया राज्य गठित करने की शक्ति प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि इसलिए पृथक बस्तर राज्य की मांग को केवल राजनीतिक मुद्दे के रूप में देखने के बजाय इसे बस्तर की जनता की आकांक्षाओं, क्षेत्र की विशिष्ट परिस्थितियों और भविष्य के विकास के व्यापक प्रश्न के रूप में देखा जाना चाहिए।

“बस्तर की आवाज को लोकतांत्रिक मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा”

लक्ष्मण बघेल ने कहा कि पृथक बस्तर राज्य की मांग *किसी व्यक्ति, समाज या क्षेत्र के विरोध में नहीं है।* यह मांग समान विकास, स्थानीय भागीदारी, सांस्कृतिक संरक्षण, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बस्तर की जनता के बेहतर भविष्य के उद्देश्य से उठाई जा रही है।

उन्होंने बस्तर के नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं, सामाजिक संगठनों, ग्रामसभाओं, बुद्धिजीवियों एवं जनप्रतिनिधियों से इस विषय पर *शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं तथ्य आधारित संवाद* में भाग लेने की अपील की।

बस्तर की पहचान सुरक्षित हो, बस्तर के संसाधनों में बस्तर की जनता का हित सुनिश्चित हो और बस्तर का विकास बस्तर की परिस्थितियों के अनुरूप हो—इसी उद्देश्य से पृथक बस्तर राज्य की मांग जायज है।”

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