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बालक छात्रावास में नियमों की उड़ी धज्जियां: रात ढलते ही चौकीदार और चपरासी बन जाते हैं ‘अधीक्षक’,

📅 27 Aug 2026, 03:21 AM ✍️ Admin 👁 5,987 Views ⏱️ 2 मिनट पठन
बालक छात्रावास में नियमों की उड़ी धज्जियां: रात ढलते ही चौकीदार और चपरासी बन जाते हैं ‘अधीक्षक’,

जगदलपुर संवादाता: राजा ध्रुव

जिन कंधों पर सैकड़ों गरीब बच्चों के भविष्य, उनकी सुरक्षा और उनकी सेहत की जिम्मेदारी है... वो जिम्मेदार शाम ढलते ही अपने घरों में चैन की नींद सो रहे हैं!

​बस्तर/जगदलपुर - आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय बालक आश्रमो व छात्रावासो में जहां सरकार हर महीने लाखों रुपये पानी की तरह बहाती है, वहीं रात होते ही यह आश्रम 'अनाथालय' जैसी स्थिति में छोड़ दिया जाता है। नियम कहते हैं कि अधीक्षक को रात में यहीं सोना है, लेकिन हकीकत यह है कि रात होते ही कमान थमा दी जाती चौकीदार और चपरासी के हाथों में?
दरअसल बता दें शासकीय प्री,मैट्रिक छात्रावास सिरसगुढ़ा में व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। नौनिहालों की सुरक्षा और देखरेख के लिए जिम्मेदार अधीक्षक श्री दीपक भरद्वाज शाम ढलते ही छात्रावास छोड़कर चले जाते हैं, और रात की कमान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों (चौकीदार और चपरासी) के हवाले कर दी जाती है। शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद अधीक्षक का रात्रि विश्राम न करना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
*चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरोसे सैकड़ों बच्चे*
नियमों के अनुसार बालक छात्रावास में रात के समय अधीक्षक की मौजूदगी अनिवार्य होती है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय लिया जा सके। इसके विपरीत, छात्रावास में रात होते ही चौकीदार और चपरासी ही अधीक्षक का दायित्व निभाते नजर आते हैं।

आपातकाल में बेबस कर्मचारी

यदि रात के समय किसी बच्चे की अचानक तबीयत बिगड़ जाए या कोई अप्रिय घटना घट जाए, तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पास न तो कोई प्रशासनिक अधिकार है और न ही संसाधन।
अनुशासन और सुरक्षा का संकट:* बच्चों के संरक्षण, स्वास्थ्य और सुरक्षा की निगरानी ऐसे कर्मचारियों पर छोड़ दी गई है, जिनका कार्य केवल सुरक्षा और साफ-सफाई तक सीमित है।

जिम्मेदार मौन, उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर अधीक्षक लगातार छात्रावास से नदारद रहते हैं? विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते अधीक्षक बेखौफ हैं और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

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